सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार


  • नेपाली मजदूरों के मामले में केंद्र से जवाब तलब
  • हाइड्रॉक्लोरोक्विन को लेकर दायर याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट में आज कई मामलों की सुनवाई हुई. राजपथ सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट, उत्तराखंड में फंसे नेपाली मजदूरों का मसला, हाइड्रॉक्लोरोक्विन और एजीथ्रोमाइसिन का कोरोना मरीजों पर इस्तेमाल समेत कई मामलों से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग बेंच ने सुनवाई की.

शुरुआत राजपथ सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से करते हैं. राजपथ केंद्रीय विस्टा परियोजना के लिए लैंड यूज को बदलने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी. इस पर चीफ जस्टिस एसए बोवड़े ने कहा कि इसी तरह की याचिका लंबित है. कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर स्टे लगाने से इनकार किया है. सीजेआई ने कहा कि कोरोना में कोई कुछ करने वाला नहीं है. कोई जल्दबाजी नहीं है.

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वहीं, एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से पूछा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए राशन कार्ड के अलावा किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है. दरअसल, कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि 1 जून से पीडीएस सिस्टम का Universalisation लागू होने की उम्मीद है, लेकिन पीडीएस में उन लोगों को शामिल नहीं किया गया है, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है.

नेपाली मजदूरों के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से उत्तराखंड में फंसे नेपाली श्रमिकों मामले जवाब देने को कहा. मजदूरों की ओर से दायर जनहित याचिक में कहा गया है कि भारत में 900 कर्मचारी फंसे हुए हैं. नेपाल सरकार ने मजदूरों को आवाजाही की इजाजत दी है. भारत सरकार को भी सुविधा देनी चाहिए. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल को निर्देश प्राप्त करने के लिए कहा है.

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वहीं, एक एनजीओ की ओर से कोरोना मरीजों को हाइड्रॉक्लोरोक्विन और एजीथ्रोमाइसिन दवा देने के खिलाफ याचिका दायर की गई थी. इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि दोनों दवाएं जटिलताओं और हृदय रोग का कारण बनती हैं. कोर्ट ने याचिका आईसीएमआर के पास भेज दी है.

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