अभिजीत बनर्जी की सलाह- प्रत्येक भारतीय को 1000 रुपये हर महीने दे सरकार


  • सरकार को सीधे गरीबों के बैंक खातों में पैसे डालने की जरूरत
  • ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड को तत्काल प्रभाव से लागू करे सरकार’

महामारी कोरोना वायरस की वजह से पिछले दो महीने में देश में लॉकडाउन लागू है, इस लॉकडाउन की वजह से सबसे ज्यादा निम्न आय वर्ग के लोग प्रभावित हुए हैं. नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने एक बार फिर दोहराया है कि इस संकट में सरकार को सीधे गरीबों के बैंक खातों में पैसे डालने की जरूरत है.

हर महीने 1000 रुपये देने की जरूरत

दरअसल नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी Esther Duflo जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के ऑनलाइन फेस्टिव में रविवार को शामिल हुईं. जहां बातचीत के दौरान अभिजीत बनर्जी ने कहा कि सरकार को कोरोना संकट के बीच हर भारतीय को कम से कम 1000 रुपये तुरंत ट्रांसफर करना चाहिए. और अगले कुछ महीने तक लगातार ट्रांसफर करने की जरूरत है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए.

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‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ की तारीफ

Duflo ने कहा कि सरकार को यूनिवर्सल अल्ट्रा बेसिक इनकम (UBI) को तत्काल लागू करने की जरूरत है. जनधन योजना इसी का एक स्वरूप है. हालांकि दोनों अर्थशास्त्रियों ने ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ स्कीम की तारीफ की. लेकिन उन्होंने कहा कि इसे तुरंत लागू करने पर सरकार का फोकस होना चाहिए. अभिजीत बनर्जी ने कहा कि जब तक कोई वैक्सीन नहीं बन जाती, तब तक संकट बना रहेगा.

इस महीने की शुरुआत में अभिजीत बनर्जी ने कहा था कि कोरोना संकट की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने 1991 के मुकाबले बड़ा पेमेंट संकट आ सकता है. उन्होंने जीडीपी में भी बड़ी गिरावट का अनुमान लगाया है. उनका कहना है सरकार को फिलहाल गरीबों के हाथों में पैसा पहुंचाने के बारे में सोचना चाहिए.

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आम आदमी में खरीदारी की क्षमता नहीं

इससे पहले अभिजीत बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से बातचीत के दौरान भी कहा था कि भारत में अभी मांग की समस्या है क्योंकि किसी के पास पैसा नहीं है तो कोई कुछ खरीद नहीं रहा है. ऐसे में लोगों को आर्थिक मदद पहुंचाने में किसी तरह की देरी करना बेकार है. लॉकडाउन की वजह से कारोबार पूरी तरह से ठप है इसलिए आर्थिक मदद की ज्यादा जरूरत है.

डिमांड बढ़ाने पर हो सरकार का फोकस

उन्होंने सरकार को सलाह दी है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए डिमांड को बढ़ाने की जरूरत है. डिमांड तभी बढ़ेगी जब लोगों में खरीदारी की क्षमता होगी. फिलहाल देश के लोगों के पास पर्याप्त खरीद क्षमता नहीं है. इसलिए आम आदमी के हाथों में पैसा पहुंचाना चाहिए. जब पैसा आम आदमी के हाथों में आएगा तो वो खर्च करेंगे और खर्च करने से डिमांड में बढ़ोतरी होगी, जिससे अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी.

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