भीलवाड़ा, आगरा मॉडल नहीं, कोरोना से ऐसे निपट रहा स्वास्थ्य मंत्रालय


  • भीलवाड़ा या आगरा जैसा कोई मॉडल नहीं
  • कंटेनमेंट उपायों पर किया जा रहा काम

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि भीलवाड़ा या आगरा जैसा कोई मॉडल नहीं है, केवल कंटेनमेंट उपायों को लेकर काम किया जा रहा है. कोई भी चूक कोरोना वायरस से निपटने के सभी प्रयासों पर पानी फेर सकती है. स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने मंगलवार को नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही.

इसके अलावा लव अग्रवाल ने प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना वायरस के संक्रमण के इलाज के दावों को भ्रामक और गैरकानूनी बताया. उन्होंने कहा कि फिलहाल यह पद्धति प्रयोग और टेस्टिंग के दौर में है. लव अग्रवाल ने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अब तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि कोविड-19 के इलाज में यह कारगर साबित हुई है.

लव अग्रवाल ने कहा कि ऐसी किसी भी पद्धति से कोरोना वायरस के संक्रमण का इलाज करना मरीज के जीवन के लिए घातक साबित हो सकता है. इसलिए आईसीएमआर द्वारा इसे इलाज की पद्धति के रूप में मान्यता दिए जाने तक इसे उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता है.

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लव अग्रवाल ने संक्रमण को रोकने के उपायों के असर की जानकारी देते हुए बताया कि जिला स्तर पर चलाये जा रहे संक्रमण रोधी अभियान के कारण देश के 17 जिले ऐसे हैं, जिनमें पिछले 28 दिनों से संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है. सोमवार को ऐसे जिलों की संख्या 16 थी. उन्होंने कहा कि 25 अप्रैल के बाद इस सूची में दो जिले (पश्चिम बंगाल का कलिंगपोंग और केरल का वायनाड) जुड़े हैं. वहीं, बिहार के लखीसराय जिले में संक्रमित मरीज मिलने के कारण यह जिला इस सूची से बाहर हो गया है.

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क्या है भीलवाड़ा मॉडल

राजस्थान के भीलवाड़ा मॉडल को कोरोना वायरस से निपटने को लेकर नजीर बताया गया. असल में, भीलवाड़ा में जब पहली बार कोरोना के पॉजिटिव केस सामने आए तो ऐसा लगा कि जैसे भीलवाड़ा भारत का दूसरा इटली बनने जा रहा है. हालांकि, गहलोत सरकार ने तुरंत एक्शन लिया और पूरे शहर में कर्फ्यू लगाकर बॉर्डर सील कर दिया, जिसके बाद डॉक्टरों की मदद से भीलवाड़ा में कोरोना के आंकड़ों को 27 पर ही रोक दिया गया. इसके बाद इस मॉडल को पूरे देश में लागू करने की मांग की जाने लगी.

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